Sunday, February 5, 2012

यात्रा से पहले

(यात्रा पर एक कविता, हेनरी मातीस की तस्वीर 
'वूमन विद ए हैट' के साथ)

यात्रा और आत्महत्या से पहले
जहां तक हो सके 

छोड़ना चाहिए सब साफ़
दर्ज है
यात्रा की
किसी किताब में

आत्महत्या कायर करता है
यात्रा साहसी का काम है
और
साफ़ है सब-कुछ
पहले ही

एक अनंत यात्रा से पहले
एक और यात्रा
एक लंबी यात्रा से पहले
एक छोटी यात्रा

मन
कब का गया
श्यामदेश की यात्रा पर
देह सामान बटोर रही है


('जनसंदेश टाइम्स' में 1 अप्रैल 2012 को प्रकाशित)

20 comments:

  1. गहन अभिवयक्ति......

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  2. बहुत सुन्दर..

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  3. एक अनंत यात्रा से पहले
    एक और यात्रा
    एक लंबी यात्रा से पहले
    एक छोटी यात्रा ... हाथ में कुछ लम्हें उग आते हैं

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  4. बढ़िया प्रस्तुति...
    आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 06-02-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  5. जब आप कमेंट्स लौटती नहीं तो कमेंट्स देने से फायदा क्या..

    नई रचना ...काव्यान्जलि ...: बोतल का दूध...
    ...फुहार....: कितने हसीन है आप.....

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  6. मन कब का गया
    श्यामदेश की यात्रा पर
    देह सामान बटोर रही है।
    बहुत सुंदर.......

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  7. इस कविता के भाव, लय और अर्थ काफ़ी पसंद आए। बिल्कुल नए अंदाज़ में आपने एक भावपूरित रचना लिखी है।...गहन अभिवयक्ति...

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  8. शाश्वत की काव्यात्मक अभिव्यक्ति...

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  9. मन कब का गया
    श्यामदेश की यात्रा पर
    देह सामान बटोर रही है।
    सुन्दर पंक्तियाँ थोड़ा हटके नए बिम्बों से लैस .

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  10. यात्रा का मार्मिक वर्णन साथ ही अध्यात्मिक कसौटी पर भी खरी ....बिलकुल लाजबाब रचना |

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  11. एक अनंत यात्रा से पहले
    एक और यात्रा
    एक लंबी यात्रा से पहले
    एक छोटी यात्रा
    sundar bhaavyavkati..

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  12. सुन्दर ,गहन अभियक्ति

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  13. एक सार्थक यात्रा,दूसरी निरर्थक....वह यात्रा भी नहीं है !

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  14. सुंदर रचना।
    गहरे भाव।

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  15. बहुत ही गहरी रचना .. जीवन के सत्य को कुछ शब्दों में बाँध दिया है ...

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  16. बहुत ही सुंदर भाव संयोजन से सुसजित गहन अभिव्यक्ति ...समय मिले कभी तो ज़रूर आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है
    http://mhare-anubhav.blogspot.com/

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  17. umdaa evem saahsik kavita... naya dekh lena aapka.. purane dharatal par taaqat hai aapke lekhan ki...

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  18. एकदम साफ़ बात, क्रिस्टल क्लीयर!

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