Tuesday, March 15, 2011

और अपना एक कमरा

कुछ लिखने का मन है
और लिखने के लिए जो असबाब चाहिए
सब है मेरे पास

आराम से इतराता हुआ दिन
विचारावेश से घिरा दिमाग
उथल-पुथल भरा एक दिल

कलम,
कागज़
ज़हीन
ख़याल
बेशुमार दौलत शब्दों की 
अदद आराम कुर्सी भी
 

और मन:स्थिति 
कि लिख सकूं कुछ
अच्छा, अनवरत
 

सब है मेरे पास 
नहीं है बस
ढेर सारा पैस

और एक
अपना कमरा
-माधवी

(वर्जीनिया वूल्फ को समर्पित)

7 comments:

  1. भारतीय ब्लॉग लेखक मंच की तरफ से आप, आपके परिवार तथा इष्टमित्रो को होली की हार्दिक शुभकामना. यह मंच आपका स्वागत करता है, आप अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "फालोवर" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच

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  2. bahut hi arthpoornn kavita... dhanyawad woolf ko yaad karaane ke liye....kuldeep kunal

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  3. लिखते रहना सबसे जरूरी ..........

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