Wednesday, November 24, 2010

उम्दा ऑमलेट लिखा मैंने

उम्दा ऑमलेट लिखा मैंने
खाई एक गरम कविता
तुमसे प्रेम करने के बाद

गाड़ी के बटन लगाए
और कोट चलाकर मैं
घर पहुंची बारिश में
तुमसे प्रेम करने के बाद

लाल बत्ती पर चलती रही
रुक गई हरी होते ही
झूलती रही बीच में कहीं
यहां कभी, वहां भी
तुमसे प्रेम करने के बाद

समेट लिया बिस्तर मैंने
बिछा दिए अपने बाल
कुछ तो गड़बड़ है
लेकिन मुझे नहीं परवाह

उतारकर रख दिए दांत
गाउन से किए गरारे
फिर खड़ी हुई मैं
और
लिटा लिया ख़ुद को
सोने के लिए
तुमसे प्रेम करने के बाद।
(अनुवाद- माधवी)

-Translation of one of the love poems by African-American poet Nikki Giovanni

15 comments:

  1. अरे वाह शर्माजी गजब की रचना ..पढ़कर आनंद आ गया ..आभार

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  2. और
    लिटा लिया ख़ुद को
    सोने के लिए..
    तुमसे प्रेम करने के बाद।

    bahut khub

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  3. गज़ब की प्रस्तुति है मज़ा आ गया अगर प्रेम के बाद ये हश्र होता है शायद तभी हर प्रेमी रात को जगता है और दिन को सोता है।

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  4. दिलचस्प !!!!
    एक दो कविताएं ओर पढवाए इस कवि की ....

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  5. What a poem! So touching one.... keep up writing wonderful words ... that could touch hearts of thousands.

    Good luck.

    Never keep your pen away from paper. Keep dotting.

    you will be there in the list of prominency one day.

    My prayers

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  6. बहुत ही सुंदर रचना ........ धन्यवाद पढवाने के लिए....

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  7. Wah! Kya kavi hai...... sach muj dil ko chuu janewala.

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  8. मजा आ गया...एकदम हट के कविता...
    बहुत सुन्दर :)

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  9. मार्मिक भावों को प्रस्तुत करती कविता ..शुक्रिया
    चलते -चलते पर आपका स्वागत है

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  10. आभार.. सभी सुधिजनों का !

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