Monday, February 28, 2011

उन्माद एक ऐसा देश है

उन्माद एक ऐसा देश है
यहीं कहीं तुम्हारे आस-पास ही
जिसके कगार सदा अंधियारे रहते हैं

पर जब कभी निराशा की नौका
तुम्हें ठेलकर अंधेरे कगारों तक ले जाती है
तो उन कगारों पर तैनात पहरेदार
पहले तो तुम्हें निर्वसन होने का आदेश देते हैं

तुम कपड़े उतार देते हो
तो वे कहते हैं, अपना मांस भी उघाड़ो
और तुम त्वचा उघेड़कर
अपना मांस भी उघाड़ देते हो

फिर वे कहते हैं कि हडिड्यां तक उघाड़ दो
और तब तुम अपना मांस नोच-नोच फेंकने लगते हो
और नोचते-फेंकते चले जाते हो
जब तक कि हड्डियां पूरी तरह नंगी नहीं हो जातीं

उन्माद के इस देश का तो एकमात्र नियम है उन्मुक्तता
और वे उन्मुक्त हो
न केवल तुम्हारा शरीर
बल्कि आत्मा तक कुतर-कुतर खा डालते हैं

पर फिर भी
मैं कहूंगी कि
यदि तुम कभी उस अंधेरे कगार तक जा ही पहुंचो
तो फिर लौटना मत
कभी मत लौटना।
-कमला दास

Thursday, February 24, 2011

एक बार जो

एक बार जो ढल जाएंगे
शायद ही फिर खिल पाएंगे

फूल, शब्द या प्रेम
पंख, स्वप्न या याद
जीवन से जब छूट गए तो
फिर न वापस आएंगे

अभी बचाने या सहेजने का अवसर है
अभी बैठकर साथ
गीत गाने का क्षण है
अभी मृत्यु से दांव लगाकर
समय जीत जाने का क्षण है

कुम्हलाने के बाद
झुलसकर ढह जाने के बाद
फिर बैठ पछताएंगे

एक बार जो ढल जाएंगे
शायद ही फिर खिल पाएंगे।
-अशोक वाजपेयी

Wednesday, February 16, 2011

तैर रही थी वो

 
पतझर का था आरम्भ
और तैर रही थी वो 
अपने जीवन के पतझर में 

पीले पत्ते-सी
और उनमुक्त।
-कमला दास 

(चित्र: कमला दास)

Saturday, February 12, 2011

क्योंकि तुम हो

मेरा अथ तुम हो
मेरी इति भी तुम

उल्लास हो, यौवन हो
मेरे चिर-आनन्द का
स्रोत हो तुम

हमक़दम, मेरे गुरूर हो
मर्यादा मेरी
सुरूर हो तुम

प्राण हो, मेरे गान हो
हस्ती हो मेरी
सरपरस्ती भी तुम

जड़ हो, मेरी ज़मीं हो
मेरे आसमां का
ध्रुव तारा हो तुम।
-माधवी 

(For my soulmate, on his birthday)
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...